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Beijing. चीन और अमेरिका में तल्खी बढ़ती जा रही है। अब चीन ने नया कदम उठाकर इस विवाद को और हवा दे दी है। चीनी सरकार ने अपने सरकारी अधिकारियों को आदेश जारी किया है कि वे अपने कार्य में आईफोन या विदेशी ब्रांड के उपकरणों का उपयोग बिल्कुल भी ना करें। इसके साथ ही कहा है कि वह इन्हें लेकर कार्यस्थल पर भी न आएं। कोई आदेश नहीं मानता है तो उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
एप्पल के उपयोग पर प्रतिबंध क्यों?
हाल के कुछ दिनों में चीनी सरकार के वरिष्ठों की ओर से बैठकों और चैट ग्रुप में कर्मचारियों को ये निर्देश दिए जा रहे थे। एप्पल के उपयोग पर यह प्रतिबंध उस समय आया है, जब अगले हफ्ते कंपनी की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित होना है। चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया यह आदेश अन्य विदेशी कंपनियों की चिंता बढ़ा सकता है। हालांकि, इस आदेश में एप्पल छोड़कर किसी कंपनी का नाम सामने नहीं आया है।
एप्पल का शेयर 1.5 प्रतिशत तक गिरा
आदेश को लेकर एप्पल और चीन के स्टेट काउंसिल इन्फार्मेशन आफिस की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। सूचना के सामने आने के बाद एप्पल का शेयर 1.5 प्रतिशत तक गिर गया था।
विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाने पर चीन का जोर
पिछले एक दशक से चीन का प्रयास रहा है कि वह विदेशी तकनीक पर अपनी निर्भरता कम करे। वह लगातार अपने फर्मों से कहता आ रहा है कि वह स्थानीय स्तर पर विकसित साफ्टवेयर की मदद से कार्य करे। साथ ही स्थानीय सेमीकंडक्टर चिप को बढ़ावा दे। चीन ने अमेरिका के साथ बढ़ते मतभेदों के बीच प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के अपने अभियान में उद्यमों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए कहा है।
अमेरिकी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करने का प्रयास
आइफोन के उपयोग पर रोक के बाद विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से पता चलता है कि बीजिंग अमेरिकी प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करने के प्रयास में किसी भी अमेरिकी कंपनी को बख्शने को तैयार नहीं है। यहां तक कि एप्पल भी अछूता नहीं है।
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